58वें महामूर्ख मेले का आयोजन,10,000 से अधिक लोग मेला देखने काशी पहुंचे मेले में बेमेल सादी कराया गया इसके अलावा अमेरिका इरान युद्ध और गैस, तेल संकट पर भी कवियों ने व्यंग के माध्यम से आनंद लिया।

काशी में 58 वर्षों से लगातार महामूर्ख मेले का आयोजन किया जा रहा है, अंग्रेज हिंदू नववर्ष, एक अप्रैल को “अप्रैल फूल डे” कहा करते थे। तब काशी के विद्वानों और साहित्यकारों ने इसका विरोध हास्य-व्यंग्य से करने का निर्णय लिया था। इसके बाद उन्होंने महामूर्ख सम्मेलन की परंपरा शुरू की।


यह मेला अपने अनूठे अंदाज के कारण लोकप्रिय है। इस वर्ष मेले में बहुचर्चित कवि दमदार बनारसी, प्रशांत बजरंगी, सलीम सिवालवी और अन्य कवियों नें व्यंग के माध्यम से लोगों को हंसाया। सम्मान के तौर पर कवियों को गोबर के उबले भेंट किये गए । इस बार महामूर्ख मेले में बेमेल सादी कराया गया इसके अलावा अमेरिका इरान युद्ध और गैस, तेल संकट पर भी कवियों ने व्यंग के माध्यम से आनंद लिया।





