काशी विद्यापीठ : महात्मा गांधी काशी विद्यापीठ के मास्टर ऑफ लॉ 2025-26 की प्रवेश प्रक्रिया में जातिवाद के आधार पर फर्जी प्रवेश देखने को मिला। कट ऑफ 272 से 348 होने के बावजूद भी एक अयोग्य अभ्यर्थी को 156 नंबर पर प्रवेश दे दिया गया। जबकि अन्य 200 से अधिक नंबर लाने वाले अभ्यर्थी अभी इंतजार कर रहे हैं।

आपको बता दें की अभ्यर्थी मानस शुक्ला का नाम मास्टर ऑफ लॉ 2025-26 की प्रवेश प्रक्रिया में तीन चरणों की काउंसिलिंग के लिए जारी की गई सूची में शामिल नहीं था। जबकि मानस शुक्ला को कथित रूप से ‘बैंक डोर’ से प्रवेश दिया गया। जबकि काउंसिलिंग प्रक्रिया 7 नवंबर को समाप्त हो चुकी थी, इसके बाद 19 नवंबर को पोर्टल दोबारा खोलकर उनका दाखिला किया गया। उनकी फीस रसीद में किसी भी विशेष कोटे का उल्लेख नहीं है।

तीसरी सूची जारी होने के बाद प्रतीक्षा सूची में शामिल अभ्यर्थियों ने प्रवेश सेल से संपर्क किया तो उन्हें बताया गया कि सभी सीटें भर चुकी हैं और अब कोई नई सूची जारी नहीं होगी। इसी बीच जनवरी के दूसरे सप्ताह में मानस शुक्ला की फीस रसीद सामने आने पर अभ्यर्थियों ने विश्वविद्यालय प्रशासन को ज्ञापन देकर शिकायत दर्ज कराई, लेकिन अधिकारियों ने इस पर कोई संज्ञान नहीं लिया।

विधि संकाय के एलएलएम पाठ्यक्रम के आवेदक छात्रों का आरोप है कि सैकड़ों अभ्यर्थियों को गुमराह कर मानस को प्रवेश दिया गया। एलएलएम की 44 सीटों के लिए 500 से अधिक अभ्यर्थियों ने आवेदन किया था। छात्रों का कहना है कि विधि पाठ्यक्रमों की प्रवेश प्रक्रिया में पिछले तीन वर्षों से अनियमितताएं सामने आ रही हैं।
प्रवेश प्रक्रिया में अनियमितताओं को लेकर लगातार सवाल उठने के बावजूद विश्वविद्यालय प्रशासन की कार्यप्रणाली में अब तक कोई सुधार दिखाई नहीं दे रहा है।