सुप्रीम कोर्ट से इच्छामृत्यु पाने वाले हरीश राणा का निधन 13 साल से दर्द भरी जिंदगी से मुक्ति पंजाब यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे। अपने पढाई के दौरान ही हॉस्टल के ही वह चौथें मंजिल से गिर गए जिसके कारण उन्हें लकवा मार दिया तभी से हरीश कोमा में थे।

गाजियाबाद के रहने वाले हरीश राणा जो कि 13 साल से कोमा में चल रहे थे वह 24 मार्च को दिल्ली के एम्स अस्पताल में अंतिम सास ली।हरीश राणा का बुधवार को दिल्ली के ग्रीन पार्क में अंतिम संस्कार किया गया ।लोगों ने नमः आँखो से विदाई दी ।

अगस्त 2013 में हुए एक हादसे ने हरीश राणा के ज़िन्दगी ही बदल दी । मात्र 19 साल की उम्र में वह कोमा में चले गए। वह चंडीगढ़ की पंजाब यूनिवर्सिटी में सिविल इंजीनियरिंग के छात्र थे। अपने पढाई के दौरान ही हॉस्टल के ही वह चौथें मंजिल से गिर गए जिसके कारण उन्हें लकवा मार दिया जिसके बाद से ही हरीश कोमा में थे।
उनकी हालत काफी नाज़ुक हो गई वह न तो बोल पाते और न ही कुछ महसूस कर पाते थे। 13 साल बिस्तर पर पड़े रहने के कारण उन्हें बेडसोर यानी शरीर पर गहरें घाव बन गए। जिससे उनकी हालत और बिगड़ गई।
हरीश के परिवार वालों ने उनकी स्थिति को देखते हुए 3 अप्रैल 2024 को दिल्ली के हाईकोर्ट में इच्छामृत्यु की याचिका दायर की।हालाकि कोर्ट ने याचिका को ख़ारिज कर दिया । इसके पश्चात परिवार ने मार्च में सुप्रीम कोर्ट में अपील की और कोर्ट ने भी याचिका मानकर इच्छामृत्यु की अनुमति दे दी ।
हरीश को 14 मार्च को दिल्ली एम्स अस्पताल में भर्ती किया गया जहाँ डाक्टर उसकी लाइफ सपोर्ट सिस्टम धीरे धीरे हटा रहे थे ।लगभग कुछ दिनों से खाना पीना भी बंद कर दिया गया था ।और 24 मार्च 2026 को एम्स अस्पताल में उनका निधन हो गया ।हरीश राणा ने 13 साल के दर्द से मुक्ति पाई।