चकबंदी अधिकारी पर रिश्वत लेने और विपक्षी के पक्ष में फैसला सुनाने का गंभीर आरोप
वाराणसी जिले में भ्रष्टाचार का एक चौंकाने वाला मामला सामने आया है। रोहनिया क्षेत्र के निवासी एक पीड़ित ने जिले के जिलाधिकारी को पत्र लिखकर बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी (SOC) पर लाखों रुपये की रिश्वत लेने और फिर भी विपक्षी के पक्ष में फैसला सुनाने का गंभीर आरोप लगाया है।

सुनवाई के दौरान अधिकारी पवन कुमार सिंधु ने दी धमकी
मिसिरपुर वाराणसी निवासी अभिषेक गिरी के अनुसार, उनकी पुश्तैनी संपत्ति का एक मामला (अपील संख्या 852/2024) बंदोबस्त अधिकारी चकबंदी के न्यायालय में विचाराधीन था । आरोप है कि सुनवाई के दौरान अधिकारी पवन कुमार सिंधु ने प्रार्थी को अपने चैम्बर में बुलाकर धमकी दी कि यदि 4 लाख रुपए नहीं दिए गए, तो वह अपील निरस्त कर देंगे और प्रार्थी अपनी पुश्तैनी जमीन से हाथ धो बैठेगा ।


पैसा इकट्ठा कर अधिकारी को दिया घूस
पीड़ित का दावा है कि उसने अपने परिवार से पैसा इकट्ठा कर अधिकारी को सूचित किया, जिसके बाद अधिकारी ने उसे वाराणसी के चांदपुर स्थित अपने निजी आवास पर शाम 7 बजे बुलाया और 4 लाख नकद रुपए प्राप्त किए ।
विपक्षी दल से चार के बदले दस लाख मिलने पर बदल दिया फैसला
शिकायतकर्ता के अनुसार, हद तो तब हो गई जब 27 अप्रैल 2026 को अधिकारी ने उसे दोबारा बुलाकर कहा कि विपक्षी दल उसे 10 लाख रुपए दे रहा है, इसलिए वह अब उन्हीं के पक्ष में फैसला सुनाएगा । पीड़ित ने जब अपने वरिष्ठ अधिवक्ता के साथ विरोध जताया, तो आरोप है कि अधिकारी ने तमाम साक्ष्यों को नजरअंदाज करते हुए विपक्षी के पक्ष में आदेश पारित कर दिया ।
भ्रष्टाचार के साक्ष्यों के आधार पर जांच की मांग
प्रार्थी अभिषेक गिरी ने जिलाधिकारी से न्याय की गुहार लगाते हुए मांग की है कि दोषी अधिकारी के मोबाइल की CDR और लोकेशन की जांच की जाए । भ्रष्टाचार के साक्ष्यों के आधार पर प्रारंभिक जांच कर मुकदमा पंजीकृत किया जाए ।





